भूपेंद्रसिंह सोलंकी – 8959570882 शाजापुर l शहर के एक मेडिकल ट्रीटमेंट देने वाले डॉक्टर साहब उस समय चर्चा का विषय बन गए, जब एक मरीज द्वारा इलाज के एवज में जमा कराई गई राशि की रसिद मांगी गई। बताया जा रहा है कि डॉक्टर द्वारा मरीज का उपचार कर लेटरपैड पर प्रमाण पत्र तो जारी कर दिया गया, लेकिन भुगतान की गई राशि की रसीद देने में असमर्थता जताई गई।
मामला तब और गरमा गया जब इस विषय को लेकर एक पत्रकार द्वारा सुबह लगभग 10 से 10:30 बजे के बीच डॉक्टर से फोन पर चर्चा की गई। शुरुआत में डॉक्टर साहब मामले को टालते नजर आए, बाद में रसीद देने की बात तो मान ली, लेकिन इसी बात को लेकर उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
आरोप है कि रात करीब 10 बजे डॉक्टर ने स्वयं फोन लगाकर पत्रकार से अभद्र भाषा में बातचीत की और गाली-गलौज तक कर डाली। इतना ही नहीं, शहर के पत्रकारों को “पैसे उगाने वाले पत्रकार” जैसे शब्दों से संबोधित कर दिया। इस घटना के बाद शहर में डॉक्टरों के व्यवहार, पेशे की गरिमा और आम नागरिकों के साथ संवाद के तौर-तरीकों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जानकारों का कहना है कि चिकित्सा जैसे संवेदनशील पेशे में संयमित भाषा और शालीन व्यवहार सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं भुगतान की रसीद देना भी पारदर्शिता और जवाबदेही का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में यदि कोई चिकित्सक इस प्रकार का व्यवहार करता है, तो यह न केवल पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचाता है बल्कि आम लोगों का विश्वास भी कमजोर करता है।
साहब अपनी तुमाखी में यह तक भूल गए कि एक डाॅक्टर की बात करने की मर्यादा क्या होना चाहिए ? कब किसे फोन लगाना चाहिए यही नहीं पत्रकार साथियों के साथ बैठे पत्रकारों ने भी जब यह वार्तालाप सुनी तो उन्हे भी यह लगा कि ‘‘लगता है डाॅक्टर साहब ने कोई ताकत की दवाई ले ली है’’ जो निर्भिक होकर फोन पर ही गालीयां देना शुरू कर दी है। साहब की आॅडियों के साथ संबंधित विभाग को भी सूचित कर दिया गया है, अब देखते हैं कि आगे क्या एक्शन लिया जाएगा।
खैर जो भी हो आगे खबर जारी रहेगी और …. साहब के पुराने किस्सों के साथ नए अनुभव लाने की कोशिश जारी रहेगी
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