कलेक्टर से बोले- साहब, खुद आकर देखिए हमारा रास्ता
शाजापुर। विकास के तमाम दावों के बीच अकोदिया के अमलावती गांव के स्कूली बच्चे आज भी 17 साल पुरानी मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। शुक्रवार को गांव में आयोजित श्मुख्यमंत्री जन विश्वास शिविर में इन बच्चों का दर्द आखिरकार छलक पड़ा। केवड़ाखेड़ी स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल तक जाने वाले कच्चे रास्ते से परेशान छात्रों ने सीधे कलेक्टर डॉ. परीक्षित संजय राव झाड़े को आवेदन सौंपा। बच्चों ने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि वे खुद मौके पर आकर सड़क की दुर्दशा देखें और निर्माण कार्य शुरू करवाएं।
रोजाना 65 बच्चे जोखिम में डाल रहे जान
अमलावती से स्कूल की दूरी महज दो किलोमीटर है, लेकिन पक्की सड़क न होने से बारिश के दिनों में यह रास्ता पूरी तरह दलदल में तब्दील हो जाता है। रोजाना गांव के 60 से 65 बच्चे इसी रास्ते से पैदल स्कूल जाते हैं। कीचड़ के कारण इस छोटे से सफर को तय करने में उन्हें दो से ढाई घंटे का समय लग जाता है। रास्ते में जहरीले जीव-जंतुओं और दुर्घटना का खौफ भी लगातार बना रहता है। विद्यार्थियों का कहना है कि सरपंच से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों तक कई बार ज्ञापन दिए गए। दो-तीन महीने पहले लिखित अर्जी भी दी गई, लेकिन जब किसी ने सुध नहीं ली तो उन्हें सीधे कलेक्टर के पास आना पड़ा।
लापरवाही पर भड़के मंत्री, मंच से ही एसडीएम को लगाई फटकार
शिविर में मौजूद उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने प्रशासनिक अधिकारियों की लेटलतीफी पर कड़ा रुख अपनाया। एक किसान की पुरानी समस्या का समाधान न होने पर मंत्री ने मंच से ही एसडीएम को सख्त लहजे में फटकार लगा दी। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाएं और उनका त्वरित निराकरण सुनिश्चित करें।
शिविर में मौके पर बंटे हितलाभ
कन्या पूजन और दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए शिविर में कलेक्टर ने कई आवेदनों का मौके पर ही निपटारा किया। पात्र हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड, लाड़ली लक्ष्मी योजना के चेक और किसान कल्याण योजना के स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। मंत्री परमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की मंशा है कि ग्रामीणों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसीलिए हर शुक्रवार को ये शिविर लगाए जा रहे हैं। कार्यक्रम के बाद कलेक्टर डॉ. झाड़े ने गांव के स्कूलों का औचक निरीक्षण भी किया और वहां पढ़ाई का स्तर सुधारने का भरोसा दिया।
17 साल का इंतजार, कलेक्टर से बोले- साहब, खुद आकर देखिए हमारा रास्ता

