नबालिग से सामूहिक ज्यादती मामले में महिला सहित 5 आरोपियों को उम्रकैद


शाजापुर। जिले के विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट ने एक नाबालिग के साथ अपहरण, डरा-धमकाकर सामूहिक ज्यादती करने और उसे बंधक बनाने के एक गंभीर मामले में फैसला सुनाया है। न्यायालय ने जघन्य अपराध में शामिल एक महिला सहित कुल 5 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सभी पर अर्थदंड भी लगाया गया है। इस मामले में आरोपियों का डीएनए मैच होना पुलिस और अभियोजन के लिए सबसे मजबूत सुबूत साबित हुआ।
अकोदिया का डॉन हूं कहकर चाकू की नोक पर किया था अगवा
जिला मीडिया प्रभारी व अभियोजन अधिकारी प्रतीक श्रीवास्तव ने बताया कि 26 जून 2025 को पीडि़ता के पिता ने शुजालपुर मंडी थाने में बेटी की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 30 जून 2025 को जब पुलिस ने पीडि़ता को दस्तयाब किया, तो उसने पुलिस को आपबीती सुनाई। पीडि़ता ने बताया कि घरवाले उसे पगली कहते थे, जिससे नाराज होकर वह 25 जून की रात 11-12 बजे घर से पैदल ही अकोदिया नाके से फुलेन गांव की तरफ जा रही थी। तभी पीछे से एक पिकअप वाहन आया, उसमें से उतरे मयंक उर्फ गोलू विश्वकर्मा ने चाकू निकालकर उसे धमकाया और कहा, मैं मयंक विश्वकर्मा, अकोदिया का डॉन हूं, चुपचाप गाड़ी में बैठ जा। डर के मारे वह गाड़ी में बैठ गई, जिसे राजा नाम का युवक चला रहा था।
ढाबे के तलघर में दरिंदगी, फिर रिश्तेदार को सौंप दिया
आरोपी मयंक ने अपने तीसरे साथी अनस को ऑटो लेकर बुलाया। इसके बाद वे उसे एक ढाबे पर ले गए, जहां मयंक ने चाकू के जोर पर ढाबा मालिक से ताला खुलवाया। वहां ढाबे के तलघर में मयंक, राजा और अनस अनीस ने नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। दरिंदगी का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। इसके बाद तीनों आरोपी उसे ऑटो में बैठाकर शाजापुर में मयंक की मौसी सुनीता राठौर के घर ले गए। मयंक ने अपनी मौसी से कहा कि तुम्हारे बेटे दुर्गेश की शादी नहीं हो रही है, हम यह लड़की लाए हैं, इससे शादी करवा दो। इसके बाद दुर्गेश ने बिना उसकी मर्जी के दो दिन तक उसे पत्नी बनाकर रखा और उसके साथ दुष्कर्म किया।
इंदौर ले जाकर भी किया दुष्कर्म, फिर बस में बैठाकर छोड़ा
पीडि़ता को बाद में आरोपी दुर्गेश और उसकी मां सुनीता वापस अकोदिया मयंक के घर छोड़ गए। वहां से मयंक, उसकी पत्नी और दुर्गेश नाबालिग को ट्रेन से इंदौर ले गए। इंदौर में मयंक के किराए के कमरे पर दुर्गेश और मयंक ने फिर उसके साथ ज्यादती की। बाद में मयंक की पत्नी ने उसे इंदौर से सारंगपुर की बस में बैठा दिया। सारंगपुर से जब वह अकोदिया पहुंची, तो सूचना मिलने पर पुलिस ने उसे अपने संरक्षण में ले लिया।
महिला भी सामूहिक ज्यादती की उतनी ही दोषी
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला किसी अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर अभियोक्त्री का रेप कराने की साझा मंशा रखती है या अपराध में सहायता करती है, तो उसे भी सामूहिक दुष्कर्म के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसके लिए महिला का स्वयं शारीरिक कृत्य में शामिल होना आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सामान्य आशय से समूह बनाकर 18 वर्ष से कम आयु की बालिका से ज्यादती करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सामूहिक बलात्कार का ही दोषी माना जाएगा।
इन आरोपियों को मिली उम्रकैद
विशेष लोक अभियोजक रमेश सोलंकी और प्रदीप कुमार भटेले के तर्कों व डीएनए साक्ष्यों से सहमत होते हुए कोर्ट ने मयंक उर्फ गोलू विश्वकर्मा 30 निवासी अकोदिया मंडी, शाहदत उर्फ राजा 26 निवासी अकोदिया मंडी, अनस उर्फ अनीस खां (24) निवासी संजय कॉलोनी, अकोदिया, दुर्गेश राठौर 28 निवासी ज्योति नगर, शाजापुर, सुनीता राठौर 54 निवासी ज्योति नगर, शाजापुर अपराध में सहयोग व षड्यंत्र के लिए आजीवन कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है।

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