खबर का खुलासा : रतलाम हत्याकांड

मुफद्दल हुसैन – रतलाम में पति द्वारा अपनी पत्नी के गले पर छुरी से वार करते हुए हत्या के मामले मेंबताया जाता है अली असगर और रुकैया का प्रेम विवाह हुआ था । मोबाइल कारोबारी का करीब सात वर्ष पूर्व व्यापार में नुकसान हुआ था जिससे वह ऊबर नहीं पाया था । संभवतः इसी वजह से वह गहरे अवसाद में जाकर मनोरोगी भी हो गया था। अली असगर का बड़ा भाई भी मनोरोगी है जिस कारण उसका विवाह नहीं हो सका है । कहते है कि दो वर्ष पूर्व भी मोबाइल कारोबारी ने अपनी पत्नी रुक़ैया के साथ लंबा झगड़ा किया था तब लड़की पक्ष के माँ बाप ने अपनी बेटी को तलाक लेकर घर यानि मायके आने की पुरजोर पेशकश की थी । लेकिन बेटी ने पति का साथ देने और निभाने का दृढ़ निश्चय उस वक्त किया और मां बाप के काल को अनसुना कर दिया।

रुकैया ने लगातार मेहनत करते हुए टोपी आदि बनाकर गृहस्थी की गाड़ी को पटरी पर लाने का अथक प्रयास किया । उसकी मिलनसारिता सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेने की प्रवृत्ति, मजलिसों में मरसिए पढ़ने आदि के कारण हर कोई उसे पसंद करते हुए पर्याप्त मान सम्मान देता था । घटना से दो तीन दिन पूर्व ही रुकैया अपने शौहर को लेकर इंदौर इलाज के लिए आई थी लेकिन अली असगर के ट्रीटमेंट प्रोसेस को देखकर उसका मन द्रवित हो गया ।

पति पर इलेक्ट्रिक शॉक्स देखना उसे गंवारा न हुआ लिहाज़ा वह चलते इलाज़ से ही अली असगर को लेकर पुनः रतलाम आ गई। डाक्टर्स के अनुसार अली असगर का मर्ज़ पीक पर पहुंच गया था और उसे कम से कम पांच दिन इंदौर इलाज के लिए रखा जाना जरूरी था । दूसरा डॉक्टर्स की खास ताकीद थी कि अली असगर के साथ घर में कोई दूसरा शख्स अकेला न रहे , अली असगर के अलावा कम से दो व्यक्ति हमेशा मौजूद रहे ताकि उसकी यकायक बिगड़ने वाली मनोदशा और एक्शन पर नियंत्रण रखा जा सके।

करीबियों के अनुसार घटना वाले दिन रुकैया की सासू जी मजलिस जा रही उन्होंने रुक़य्या से भी चलने की गुहार लगाई लेकिन पिछली ही रात को इंदौर से पति के साथ इलाज कराकर लौटी रुक़य्या थकान के मारे आराम तलब थी। कुछ लोग कहते है कि सासू के जाने के बाद उनके ससुर ने बहु से कहा कि वे ज़बीहत करके आते है। पिता के ये शब्द मनो रोगी अली असगर के कानों में पड़े और उसने कुछ ही देर बाद गहरी नींद के आगोश में जा चुकी रुक़य्या को हमेशा की नींद में सुला दिया।

दो वर्ष पहले मां बाप की तरफ से आए वेक अप कॉल को रुक़य्या ने सीरियसली न लेते हुए शौहर का साथ देकर उसकी सच्ची हमराह बनने और एक जिम्मेदार पत्नी बनते हुए घर की बागडोर पूरी निष्ठा से सम्हालने की चेष्टा की नतीजतन एक बड़ी दुर्घटना का शिकार होकर असामयिक दर्दनाक मौत को आग़ोश में लेकर दुनिया से रुखसत हो गई। मरहूम रुक़य्या इन मायनों में सेल्यूट और सम्मान की अधिकारी है कि उसने अली असग़र की मनोदशा और परिवार पर मंडराते गहरे आर्थिक संकट को जानते समझते हुए भी गृहस्थी बचाने की पुरजोर और ईमानदार जद्दोजहद की ।

आजकल के चट शादी पट तलाक़ के बिगड़े दौर में रुक़य्या का संघर्ष और संकल्प मायने रखता है हालांकि उसकी परिणिति दुःखद अंत से हुई । अली असग़र अब सलाखों के गहरे अंधकार में है मनोरोगी होने से उसे कुछ भी भान नहीं है कि उसके हाथों से क्या अनर्थ हो गया है । अली असग़र और रुकैया से जन्मे दो मासूम बच्चों के लिए आगे का सफ़र लंबा और इम्तहान दे भरा हुआ है। 😢😢

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