व्यंग- जैसे ही सुबह उठकर अखबार का पन्ना पलटा, महीनों से अच्छे व्यापार की सोच ने नया और सस्ता उपाय सामने लाकर खड़ा कर दिया। शहर में पहले ही छोटे से लेकर बड़े व्यापार की हर तरह की जुगत काम नहीं आ पाई, पर आज की खबर ने वो काम किया जो ‘‘हिंग लगे ना फिटकरी, रंग भी चैखा हो’’ जैसा काम कर दिया।
इन्स्टाग्राम और यु-ट्युब पर अपनी रील के ज़रिये आसानी से पैसे बनाने से भी आसान काम मिल गया। इन्ही इन्स्टाग्राम और यु-ट्युब पर कम लागत में अच्छा बिज़नेस का आईडिया देखकर भी बोर हो गए, और जब इन टिप्स पर काम करना चाहा तो पता चला की लागत तो कौड़ी भर की पर मेहनत हज़ार बरस की लग रही है, पर हम तो ठहरे आलसी निखट्टु, पैसा भी ना लगे और महनत भी, साथ में मज़ा भी आ जाए, मज़दूरी भी ना देना पड़े और काम भी आसान हो जाए, इसी उधेड़-बुन में लगे थे कि, अखबार की खबर ने सुनहरा अवसर प्रदान कर दिया, बस सुबह सवेरे निकल पड़े और सौदा पक्का कर आए हैं।
अब जो भी कार्यक्रम हो जिसमें डी.जे. बजेगा तो जिस मकान को ढहाना है उसके सामने डी.जे. थोड़ी देर ज़्यादा बजा दिया जाएगा। मकान भी गिर जाएगा और महनत भी नहीं लगेगी। साथ में मकान गिराने की कीमत मिलेगी उसमें से 10 प्रतिशन डी.जे. को मिल जाएगा, साथ ही साथ मकान गिराने वाले को परमीशन भी नहीं लेना पड़ेगी क्योंकि यह खर्च कार्यक्रम वालों उठा ही रहे हैं। न हथौड़ा लगेगा न मशीन, और ज़मीदोज़ खुबसूरती से, साथ में अगले दिन अखबार में जगह भी, है ना फायदे का सौदा।
बिना हथौड़ा मकान तोड़े जाते हैं

